घर बैठे ₹ 5000* में नयी होण्डा JAZZ आपकी

भारत में होण्डा ने 26 अगस्त 2020 को अपनी प्रीमियम हैचबैक (Premium Hatchback) कार लांच है। होण्डा ने बाज़ार की बदलती ज़रूरतों को मद्देनज़र रखते हुए इस नई कार में बहुत से परिवर्तन किये है। इस नई कार में अधिक कैबिन स्पेस (Cabin Space), बेहतर वायुगतिकी (Aerodynamics), उन्नत प्रौद्योगिकी (Advance Technology), होण्डा द्वारा काले रंग की क्रोम ग्रिल, उन्नत डीआरएल (Day Time Running) लाइट्स, विशिष्ठ प्रकार की रियर स्पोइलर एलईडी लाइट्स (Rear Spoiler Lights), नए डिज़ाइन वाले आगे और पीछे के बंपर्स (Bumpers) के साथ साथ एक स्विच दबाते ही खुल जाने वाली सनरूफ (One Touch Sunroof) और बहुत से अत्याधुनिक सुरक्षा उपाय (Advance Safety Features) शामिल है।

One Touch Sunroof Honda Jazz ZX

इंटीरियर

वाहन चालकों के यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कंपनी द्वारा कार के केबिन में महत्वपूर्ण बदलाव किये है। इनमे नया सॉफ्ट टचपैड डैशबोर्ड (Soft Touch pad Dashboard ), क्रूज कण्ट्रोल (Cruise Control), टचस्क्रीन के साथ ऑटो एसी (Auto AC), ईको असिस्ट (ECO Assist), मल्टी इनफार्मेशन कॉम्बीमीटर (Multi Information), स्टीयरिंग पर ऑडियो कण्ट्रोल (Steering Mounted Audio Control) , वायरलेस चार्जिंग (Wireless Charging)आदि प्रमुख विशेषताएं है। डैशबोर्ड बहुत ही सुन्दर और आकर्षक प्रतीत होता है।

इंजन

होण्डा ने अपनी इस कार में सुंदरता और सहूलियत के साथ साथ वाहन क्षमता और प्रदर्शन (Power & Performance) पर भी काफी ध्यान दिया है। इस कार में 1.2 लीटर का बी.इस. 6 आई-वीटेक (i -VTEC ) इंजन है जो मानव संचालित (Manual) और स्वचालित या ऑटोमैटिक (CVT-Continuously Variable Transmission) दोनों विकल्पों में उपलब्ध है। होण्डा के अनुसार इस कार का स्वचालित विकल्प 17.1 किलोमीटर प्रति लीटर की दर से ईंधन की खपत करता है।

सुरक्षा विकल्प

यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए JAZZ में दो फ्रंट एयरबैग, इलेक्ट्रॉनिक ब्रेक बल वितरण के साथ संकलित एंटी लॉक ब्रैकिंग सिस्टम (ABS With EBD), बहु-दृश्य पिछला कैमरा (Multi – View Rear Mirror), पिछला पार्किंग सेंसर (Rear Parking Sensor), दुर्घटना की स्तिथि में टक्कर का प्रभाव शमन करने वाला अगला और पिछला हिस्सा (Impact Mitigating Front & Rear) आदि प्रमुख सुरक्षा विकल्प है।

एक्स शोरूम कीमत

JAZZVVXZX
Manual 7,49,900₹ 8,09,000₹ 8,73,900
CVT Automatic 8,49,900 9,09,900 9,73,900
एक्स शोरूम कीमत : दिल्ली

वारंटी और रखरखाव

होण्डा अपनी इस नै कार के साथ 3 साल की अनिश्चित किलोमीटर (Unlimited Kilometres) की वारंटी दे रहा है। इसके बाद ग्राहक चाहे तो दो साल की अतिरिक्त वारंटी निश्चित या अनिश्चित किलोमीटर पर ले सकता है। ग्राहक वहां की खरीदते समय मात्र ₹ 11, 670 में 3 साल या 30,000 किलोमीटर का मैंटेनैंस पैकेज खरीद सकते है।

*बुकिंग सुविधा

अगर आप यह वाहन खरीदना चाहते है तो होण्डा की होण्डा फ्रॉम होम (Honda From Home) सुविधा का लाभ लेकर आप इस गाडी को घर बैठे मात्र ₹ 5000 में बुक कर सकते है, यह राशि शोरूम पर बुकिंग हेतु ₹ 21,000 राखी गयी है।

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टायर का रखें विशेष ख्याल

“कार के टायर कब बदलना चाहिए” यह सवाल हमसे अकसर पूछा जाता है। टायर कार का सबसे महत्वपूर्ण अंग है और इसके रखरखाव के प्रति किसी भी प्रकार इन अनदेखी जानलेवा साबित हो सकती है। पाठकों की मांग पर इस लेख में हम कार के टायर से सम्बंधित विभिन्न जानकारियां साझा करेंगे, हिंदी भाषा में इस विषय पर बहुत ही कम जानकारियां उपलब्ध है, ऐसे में भारतीय होने के नाते हमारा दायित्व और बढ़ जाता है।

टायर के रखरखाव से सम्बंधित विभिन्न जानकारियां तो सरलता से उपलब्ध है परन्तु टायर कब बदलना है, इस बात का ठीक ठीक अनुमान लगाना तो बहुत मुश्किल है परन्तु विभिन टायर निर्माताओं द्वारा जारी दिशानिर्देशिका (Guidelines) इस सन्दर्भ में महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान करती है। इस लेख के माध्यम से हम दोनों विषयों पर प्रकाश डालेंगे।

टायर की उम्र

अगर आपके द्वारा उपयोग में लाये जा रहे टायर 5 वर्ष (5 Years) से अधिक पुराने है, तो आपको साल में कम से कम दो बार किसी पेशेवर (Professional) से टायर की जांच अवश्य करवानी चाहिये।

और अगर आपके द्वारा इस्तेमाल में लाये जा रहे टायर 10 वर्ष (10 Years) से अधिक पुराने है तो उन्हें तुरंत बदल देना चाहिए।

बार-बार पंचर होने पर

अगर आपके द्वारा उपयोग में लाया जा रहा टायर बार – बार पंचर होता है तो उसे तुरंत ही बदल देना चाहिए। बहुत से कार भले ही वह बहुत कम घीसा हुआ हो। ऐसा टायर मुश्किल सड़क यात्रा में फट सकता जो जानलेवा सिद्ध हो, ऊबड़-खाबड़ (Uneven Terrain) ढलानों पर ऐसी संभावना बहुत अधिक होती है।

सेकंड हैंड टायर

ग्रामीण अंचल में सेकंड हैंड टायर (Used Tyre)का उपयोग बहुत प्रचलित है और ऐसे टायर का उपयोग जान और माल की हानि होने की संभावना को बहुत अधिक बढ़ा देता है। सेकंड हैंड टायर का उपयोग किसी प्रकार की बेहद आपातकाल की स्तिथि में ही करें और गंतव्य पर पहुँच कर इसे तुरंत नये टायर से बदल लेना चाहिए।

हवा का दबाव

टायर के रखरखाव और जांच में हवा का दबाव अत्यंत महत्वपूर्ण है, किसी टायर में कम वायुदाब (Air Pressure) और किसी में अधिक होने पर कार का वज़न सामान रूप से विभाजित (Distribute) नहीं हो पाता और टायर को नुकसान पहुंचता है । ऐसी स्तिथि में गर्म मौसम के दौरान टायर बहुत जल्दी ख़राब हो सकता है। अगर हवा भरने पर आपके कार के टायर बाहरी हिस्से पर या बीच में से फूल जाए या उभार दिखें तो आपको टायर तत्काल बदलने की आवश्यकता है।

विषम घिसाई (Uneven Wear)

टायर की विषम घिसाई का सबसे बड़ा कारण टायर के पंक्तिकरण (Wheel Alignment) में असमानता है, यह ऐसा करक है जो बहुत जल्द की नये टायर को अनुपयोगी बना देता है। अतः यह महत्वपूर्ण है की आप इसको नज़रअंदाज ना करें।

कितना कटा हुआ टायर इस्तेमाल किया जा सकता है

बहुत से कार मालिक टायर कटा हुआ होने पर भी उसका उपयोग करते रहते है, परन्तु यह गलती जानलेवा सिद्ध हो सकती है। विशेषज्ञों का यह मानना है की की टायर में 0.635 सेंटीमीटर कट लगा हुआ होने पर उसे तुरंत बदल लेना चाहिए।

टायर का स्थान बदलना

निश्चित अंतराल में टायर का स्थान बदलना (Tyre Rotation) बहुत लाभकारी सिद्ध हो सकता है। यह टायर को घिसने से बचाता है। यह तकनीक इसलिए कारगर है क्यूंकि, कार में सफर करने वालों की संख्या कभी निर्धारित नहीं होती। हो सकता है कभी कार में आप अकेले हो या पूरे परिवार के साथ हों, ऐसे में टायर पर पड़ने वाला दबाव भी भिन्न भिन्न होता है।

टायर का वर्ग

यह ध्यान रखने योग्य है कि, उपयोग में लाये जा रहे टायर का वर्ग (Tyre Group) एक ही हो। अगर आपको कार का टायर बदलने की आवश्यकता है तो, जोड़े में टायर बदले और हमेशा ध्यान रखे की वे टायर एक ही वर्ग के हों। जिस से की वाहन का भार समान रूप से विभाजित हो सकेगा।

सावधानियां

कार चलते समय बार बार झटके से ब्रेक दबाना, गाड़ी की गति तो बार-बार तेज़ी से बढ़ाना और घटाना, टायर में बहुत अधिक हवा या कम हवा होने पर भी कार का उपयोग करना, कार की क्षमता से अधिक लोगों को बिठाकर (Overload) कार में सफर करना भी कार के टायरों को जल्द ही ख़राब कर सकता है।

यह 6 बातें आपकी जान बचा सकती है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में विश्व की तुलना में मात्र 1 प्रतिशत वाहन है, परन्तु यहाँ 6 प्रतिशत सड़क दुर्घटनायें होती है। दक्षिण पूर्वी एशिया में सड़क हादसों से होने वाली मौतों में भारत का हिस्सा लगभग 73 प्रतिशत है, जो बहुत ही चिंतनीय और गंभीर विषय है। भारत एक तेज़ी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था है और यहां साक्षरता की दर में पिछले एक दशक में बड़ी वृद्धि भी दर्ज की गयी है, फिर भी इतनी बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाओं का होना बहुत चिंतनीय है। हमारे देश में वाहन चालक का लाइसेंस किस प्रकार आवंटित किया जाता है यह तो सब जानते है, इस लेख में हम बहुत संक्षेप (Precised) में वाहन चलाने से सम्बंधित महत्वपूर्ण दिशा निर्देशों के विषय में बात करेंगे जो आपको सड़क दुर्घटनाओं से बचा सकते है। एक बार अवश्य सोचें क्या आप वाहन चलाते समय इन बातों का

बायें चले

भारत में कार राइट हैंड ड्राइव होती है, इसलिए वाहन को हमेशा बायीं लेन में चलाना चाहिए , जिस से की आप ओवरटेक कर रहे वाहन को स्पष्ट रूप से देख सकें और निर्धारित दूरी बना सकें।

गाडी किस प्रकार मोड़े

बायां मोड़ लेना है तो, सड़क की बायीं ओर बने रहे और दिशासूचक (Indicator) का संकेत प्रारम्भ कर वाहन को मोड़े। अगर आप दाहिनी ओर मुड़ना चाहते है तो, पहले वाहन को धीरे धीरे सड़क के बीच में लेकर आयें और दिशासूचक के या हाथ का इशारा दे कर वाहन को मोड़े।

ओवरटेक

गलत तरफ से ओवरटेक करना सबसे सामन्य गलती है जो की सबसे अधिक की जाती है और सबसे अधिक मौतें सड़क दुर्घटना में इस वजह से ही होती है। भारत में बायीं तरफ से ओवरटेक करना दंडनीय अपराध है, क्यूंकि यहाँ वाहन राइट हैंड ड्राइव होते है।

यातायात चिह्न

वाहन चालक को यातायात चिन्हों की समझ होना अत्यंत आवश्यक है। यह वाहन चालक को रास्ते की विषय में सतर्क करते है, अगर आपको इन चिन्हों की ठीक समझ ना हो तो ह सकता है आप किसी दुर्घटना के शिकार हो जायें। कम से कम वाहन चालक बहुत से सामन्य चिन्ह जैसे की फिसलन भरी सड़क, ओवरटेक करना मना है, खड़ी चढ़ाई, तीखा उतार, भूस्खलन आदि की पहचान आवश्यक है।

गति सीमा

गति सीमा का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। विभिन्न शासकीय संस्थायें गहरे अनुसन्धान से आधार पर यह तय करती है कि, किस सड़क पर कितनी गति से वाहन चलना सुरक्षित होगा। आपने अक्सर देखा होगा कि, बहुत सी ऐसी सड़कें होती है जहां बहुत कम यातायात होने के बावजूद भी गति सीमा बहुत काम होती है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण घाट का इलाका है।

डिपर का प्रयोग

रात्रि के समय वाहन चालन में डिपर का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। हाई बीम पर सतत गाड़ी चलाने से सामने से आ रहे वाहन को सड़क देखने में कठिनाई का सामना करना पड़ता, जिस कारणवश दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है। अतः रात्रि में डिपर का प्रयोग ओवरटेक करने और पास देते समय करना आवश्यक है।

इस लेख में और भी जानकारियां दी जा सकती थी, परन्तु यहाँ सिर्फ वही बातों को लिखा गया है जो आमतौर पर नज़रअंदाज की जाती है। आशा है यह जानकारी आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगी और वाहन चलाते समय आप इन बातों का अवश्य ध्यान रखेंगे।