यह 6 बातें आपकी जान बचा सकती है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में विश्व की तुलना में मात्र 1 प्रतिशत वाहन है, परन्तु यहाँ 6 प्रतिशत सड़क दुर्घटनायें होती है। दक्षिण पूर्वी एशिया में सड़क हादसों से होने वाली मौतों में भारत का हिस्सा लगभग 73 प्रतिशत है, जो बहुत ही चिंतनीय और गंभीर विषय है। भारत एक तेज़ी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था है और यहां साक्षरता की दर में पिछले एक दशक में बड़ी वृद्धि भी दर्ज की गयी है, फिर भी इतनी बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाओं का होना बहुत चिंतनीय है। हमारे देश में वाहन चालक का लाइसेंस किस प्रकार आवंटित किया जाता है यह तो सब जानते है, इस लेख में हम बहुत संक्षेप (Precised) में वाहन चलाने से सम्बंधित महत्वपूर्ण दिशा निर्देशों के विषय में बात करेंगे जो आपको सड़क दुर्घटनाओं से बचा सकते है। एक बार अवश्य सोचें क्या आप वाहन चलाते समय इन बातों का

बायें चले

भारत में कार राइट हैंड ड्राइव होती है, इसलिए वाहन को हमेशा बायीं लेन में चलाना चाहिए , जिस से की आप ओवरटेक कर रहे वाहन को स्पष्ट रूप से देख सकें और निर्धारित दूरी बना सकें।

गाडी किस प्रकार मोड़े

बायां मोड़ लेना है तो, सड़क की बायीं ओर बने रहे और दिशासूचक (Indicator) का संकेत प्रारम्भ कर वाहन को मोड़े। अगर आप दाहिनी ओर मुड़ना चाहते है तो, पहले वाहन को धीरे धीरे सड़क के बीच में लेकर आयें और दिशासूचक के या हाथ का इशारा दे कर वाहन को मोड़े।

ओवरटेक

गलत तरफ से ओवरटेक करना सबसे सामन्य गलती है जो की सबसे अधिक की जाती है और सबसे अधिक मौतें सड़क दुर्घटना में इस वजह से ही होती है। भारत में बायीं तरफ से ओवरटेक करना दंडनीय अपराध है, क्यूंकि यहाँ वाहन राइट हैंड ड्राइव होते है।

यातायात चिह्न

वाहन चालक को यातायात चिन्हों की समझ होना अत्यंत आवश्यक है। यह वाहन चालक को रास्ते की विषय में सतर्क करते है, अगर आपको इन चिन्हों की ठीक समझ ना हो तो ह सकता है आप किसी दुर्घटना के शिकार हो जायें। कम से कम वाहन चालक बहुत से सामन्य चिन्ह जैसे की फिसलन भरी सड़क, ओवरटेक करना मना है, खड़ी चढ़ाई, तीखा उतार, भूस्खलन आदि की पहचान आवश्यक है।

गति सीमा

गति सीमा का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। विभिन्न शासकीय संस्थायें गहरे अनुसन्धान से आधार पर यह तय करती है कि, किस सड़क पर कितनी गति से वाहन चलना सुरक्षित होगा। आपने अक्सर देखा होगा कि, बहुत सी ऐसी सड़कें होती है जहां बहुत कम यातायात होने के बावजूद भी गति सीमा बहुत काम होती है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण घाट का इलाका है।

डिपर का प्रयोग

रात्रि के समय वाहन चालन में डिपर का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। हाई बीम पर सतत गाड़ी चलाने से सामने से आ रहे वाहन को सड़क देखने में कठिनाई का सामना करना पड़ता, जिस कारणवश दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है। अतः रात्रि में डिपर का प्रयोग ओवरटेक करने और पास देते समय करना आवश्यक है।

इस लेख में और भी जानकारियां दी जा सकती थी, परन्तु यहाँ सिर्फ वही बातों को लिखा गया है जो आमतौर पर नज़रअंदाज की जाती है। आशा है यह जानकारी आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगी और वाहन चलाते समय आप इन बातों का अवश्य ध्यान रखेंगे।

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